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ramayan 5.38.42: पवनकुमार! नाग, गन्धर्व, देवता और मरुद्गण- इनमें से कोई भी युद्ध में श्री रामचन्द्रजी का वेग सहन नहीं कर सकता॥42॥   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.38.42 
न नागा नापि गन्धर्वा न सुरा न मरुद‍्गणा:।
रामस्य समरे वेगं शक्ता: प्रतिसमीहितुम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
पवनकुमार! नाग, गन्धर्व, देवता और मरुद्गण- इनमें से कोई भी युद्ध में श्री रामचन्द्रजी का वेग सहन नहीं कर सकता॥42॥
 
Pawan Kumar! Nagas, Gandharvas, gods and Marudgans - none of them can bear the speed of Shri Ramchandraji in the battle. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)