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ramayan 5.38.40: आपकी कोई सीमा नहीं है - आप अनंत हैं। आपको कोई विचलित या पराजित नहीं कर सकता। आप समुद्र के समान अथाह हैं। आप समुद्र पर्यन्त सम्पूर्ण पृथ्वी के स्वामी हैं और इन्द्र के समान तेजस्वी हैं। मैं आपकी शक्ति को जानता हूँ॥40॥   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.38.40 
अपारवारमक्षोभ्यं गाम्भीर्यात् सागरोपमम्।
भर्तारं ससमुद्राया धरण्या वासवोपमम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
आपकी कोई सीमा नहीं है - आप अनंत हैं। आपको कोई विचलित या पराजित नहीं कर सकता। आप समुद्र के समान अथाह हैं। आप समुद्र पर्यन्त सम्पूर्ण पृथ्वी के स्वामी हैं और इन्द्र के समान तेजस्वी हैं। मैं आपकी शक्ति को जानता हूँ॥40॥
 
‘You have no limits – you are infinite. No one can disturb or defeat you. You are as deep as the ocean. You are the master of the entire earth up to the ocean and are as illustrious as Indra. I know your power.॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)