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ramayan 5.38.39: दया सबसे बड़ा गुण है, यह मैंने आपसे सुना है। मैं आपको अच्छी तरह जानता हूँ। आपका बल, पराक्रम और उत्साह महान हैं॥ 39॥   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.38.39 
आनृशंस्यं परो धर्मस्त्वत्त एव मया श्रुतम्।
जानामि त्वां महावीर्यं महोत्साहं महाबलम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
दया सबसे बड़ा गुण है, यह मैंने आपसे सुना है। मैं आपको अच्छी तरह जानता हूँ। आपका बल, पराक्रम और उत्साह महान हैं॥ 39॥
 
Kindness is the greatest virtue, I have heard this from you. I know you very well. Your strength, valour and enthusiasm are great.॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)