Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.38.37: हे वानरश्रेष्ठ! तुम जाकर मेरे स्वामी से कहो - 'हे प्रभु! हे पृथ्वी के स्वामी! आपने मेरे प्रति एक साधारण-सा अपराध करने वाले कौवे पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया; फिर आप उसे कैसे क्षमा कर रहे हैं जिसने मुझे आपसे हरण किया?'   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.38.37 
मत्कृते काकमात्रेऽपि ब्रह्मास्त्रं समुदीरितम्।
कस्माद् यो माहरत् त्वत्त: क्षमसे तं महीपते॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! तुम जाकर मेरे स्वामी से कहो - 'हे प्रभु! हे पृथ्वी के स्वामी! आपने मेरे प्रति एक साधारण-सा अपराध करने वाले कौवे पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया; फिर आप उसे कैसे क्षमा कर रहे हैं जिसने मुझे आपसे हरण किया?'
 
O best of the monkeys! You go and tell my master - 'My lord! O lord of the earth! You used the Brahmastra on a crow who had committed a simple crime against me; then how are you forgiving the one who kidnapped me from you?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)