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श्लोक 5.38.31  |
अनुसृष्टस्तदा काको जगाम विविधां गतिम्।
त्राणकाम इमं लोकं सर्वं वै विचचार ह॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| कौआ अपने प्राण बचाने के लिए नाना प्रकार से उड़ता रहा और संसार भर में दौड़ता रहा, परंतु बाण ने उसका पीछा कहीं भी नहीं छोड़ा ॥31॥ |
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| The crow flew in various ways to save its life and kept running all over the world, but the arrow did not stop chasing it anywhere.॥ 31॥ |
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