श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.38.28 
ततस्तस्मिन् महाबाहु: कोपसंवर्तितेक्षण:।
वायसे कृतवान् क्रूरां मतिं मतिमतां वर:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उस समय बुद्धिमानों में श्रेष्ठ महाबाहु श्री रामजी की आँखें क्रोध से घूमने लगीं और उन्होंने उस कौए को कठोर दण्ड देने का विचार किया॥28॥
 
‘At that time the eyes of the mighty-armed Shri Ram, the best amongst the wise, started rolling with anger. He thought of giving a severe punishment to that crow.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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