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ramayan 5.38.26: यह कहकर जब उसने इधर-उधर देखा तो उसे वह कौआ दिखाई दिया जो मेरी ओर मुँह करके बैठा था। उसके तीखे पंजे खून से सने हुए थे।   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.38.26 
वीक्षमाणस्ततस्तं वै वायसं समवैक्षत।
नखै: सरुधिरैस्तीक्ष्णैर्मामेवाभिमुखं स्थितम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर जब उसने इधर-उधर देखा तो उसे वह कौआ दिखाई दिया जो मेरी ओर मुँह करके बैठा था। उसके तीखे पंजे खून से सने हुए थे।
 
Having said this, when he looked around, he saw the crow which was sitting facing me. Its sharp claws were stained with blood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)