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ramayan 5.38.20: नाथ! कौए ने मुझे बहुत क्रोधित कर दिया था। मेरे चेहरे पर आँसू बह रहे थे और मैं धीरे-धीरे आँखें पोंछ रहा था। आपने मेरी हालत देखी।'   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.38.20 
बाष्पपूर्णमुखी मन्दं चक्षुषी परिमार्जती।
लक्षिताहं त्वया नाथ वायसेन प्रकोपिता॥ २०॥
 
 
अनुवाद
नाथ! कौए ने मुझे बहुत क्रोधित कर दिया था। मेरे चेहरे पर आँसू बह रहे थे और मैं धीरे-धीरे आँखें पोंछ रहा था। आपने मेरी हालत देखी।'
 
Nath! The crow had enraged me. Tears were flowing down my face and I was slowly wiping my eyes. You noticed my condition.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)