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ramayan 5.38.11: हनुमान जी के ऐसा कहने पर देवी के समान तेजस्वी सीताजी धीरे-धीरे अश्रुपूर्ण शब्दों में इस प्रकार बोलीं-॥11॥   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.38.11 
एवमुक्ता हनुमता सीता सुरसुतोपमा।
उवाच वचनं मन्दं बाष्पप्रग्रथिताक्षरम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हनुमान जी के ऐसा कहने पर देवी के समान तेजस्वी सीताजी धीरे-धीरे अश्रुपूर्ण शब्दों में इस प्रकार बोलीं-॥11॥
 
On Hanuman ji saying this, Sita, who was as bright as a goddess, spoke slowly in tearful words as follows - ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)