श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.38.1 
तत: स कपिशार्दूलस्तेन वाक्येन तोषित:।
सीतामुवाच तच्छ्रुत्वा वाक्यं वाक्यविशारद:॥ १॥
 
 
अनुवाद
सीता के वचन सुनकर वानरश्रेष्ठ हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न हुए। वे बातचीत में कुशल थे। उपरोक्त वचन सुनकर उन्होंने सीता से कहा - ॥1॥
 
Hanuman ji, the best of the monkeys, was very pleased with Sita's words. He was skilled in conversation. After listening to the above words, he said to Sita - ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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