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श्लोक 5.37.65  |
श्रुताश्च दृष्टा हि मया पराक्रमा
महात्मनस्तस्य रणावमर्दिन:।
न देवगन्धर्वभुजङ्गराक्षसा
भवन्ति रामेण समा हि संयुगे॥ ६५॥ |
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| अनुवाद |
| मैंने युद्ध में शत्रुओं का संहार करने वाले महान् भगवान् रामजी के पराक्रम को अनेक बार देखा और सुना है। देवता, गन्धर्व, नाग और राक्षस मिलकर भी युद्ध में उनकी बराबरी नहीं कर सकते॥ 65॥ |
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| I have seen and heard many times about the prowess of the great Lord Rama who slays his enemies in battle. Even the gods, Gandharvas, serpents and demons put together cannot match him in battle.॥ 65॥ |
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