Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.37.65: मैंने युद्ध में शत्रुओं का संहार करने वाले महान् भगवान् रामजी के पराक्रम को अनेक बार देखा और सुना है। देवता, गन्धर्व, नाग और राक्षस मिलकर भी युद्ध में उनकी बराबरी नहीं कर सकते॥ 65॥ | ramayan सर्ग 5.37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रुताश्च दृष्टा हि मया पराक्रमा
महात्मनस्तस्य रणावमर्दिन:।
न देवगन्धर्वभुजङ्गराक्षसा
भवन्ति रामेण समा हि संयुगे॥ ६५॥
अनुवाद
मैंने युद्ध में शत्रुओं का संहार करने वाले महान् भगवान् रामजी के पराक्रम को अनेक बार देखा और सुना है। देवता, गन्धर्व, नाग और राक्षस मिलकर भी युद्ध में उनकी बराबरी नहीं कर सकते॥ 65॥
I have seen and heard many times about the prowess of the great Lord Rama who slays his enemies in battle. Even the gods, Gandharvas, serpents and demons put together cannot match him in battle.॥ 65॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥