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ramayan 5.37.62: वानरश्रेष्ठ! (आपके साथ न जा पाने का एक और मुख्य कारण है -) वीर वानर! अपनी पतिभक्ति को ध्यान में रखते हुए, मैं भगवान् श्री राम के अतिरिक्त अन्य किसी पुरुष के शरीर का स्वेच्छा से स्पर्श नहीं करना चाहती हूँ॥ 62॥   |   ramayan सर्ग 5.37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  5.37.62 
भर्तुर्भक्तिं पुरस्कृत्य रामादन्यस्य वानर।
नाहं स्प्रष्टुं स्वतो गात्रमिच्छेयं वानरोत्तम॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
वानरश्रेष्ठ! (आपके साथ न जा पाने का एक और मुख्य कारण है -) वीर वानर! अपनी पतिभक्ति को ध्यान में रखते हुए, मैं भगवान् श्री राम के अतिरिक्त अन्य किसी पुरुष के शरीर का स्वेच्छा से स्पर्श नहीं करना चाहती हूँ॥ 62॥
 
Best of monkeys! (There is one more main reason for not being able to accompany you -) Brave monkey! Keeping my devotion towards my husband in mind, I do not wish to voluntarily touch the body of any man other than Lord Shri Ram.॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)