श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  5.37.60 
मयि जीवितमायत्तं राघवस्यामितौजस:।
भ्रातॄणां च महाबाहो तव राजकुलस्य च॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! परम बलशाली श्री रघुनाथजी, उनके भाई, आपके तथा वानरराज सुग्रीव के कुल का जीवन मुझ पर निर्भर है॥60॥
 
Mahabaho! The life of the immensely powerful Sri Raghunathji, his brothers, yours and the life of the clan of the monkey king Sugreeva depend on me. ॥ 60॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas