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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  5.37.59 
आरम्भस्तु मदर्थोऽयं ततस्तव निरर्थक:।
त्वया हि सह रामस्य महानागमने गुण:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
‘यदि ऐसा हुआ तो मेरे लिए तुम्हारा सारा प्रयत्न व्यर्थ हो जाएगा। यदि श्री रामचन्द्रजी तुम्हारे साथ यहाँ आएँ तो उनके आने से बड़ा लाभ होगा॥ 59॥
 
‘If this happens, then all your efforts for me will be in vain. If Shri Ramchandraji comes here with you, then his coming will be of great benefit.॥ 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)