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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  5.37.56 
अहं वापि विपद्येयं रक्षोभिरभितर्जिता।
त्वत्प्रयत्नो हरिश्रेष्ठ भवेन्निष्फल एव तु॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
"अथवा हे वानरों के मुखिया! यदि राक्षसों के अत्यधिक डाँटने से मेरी मृत्यु हो गई, तो तुम्हारा सारा प्रयत्न व्यर्थ हो जाएगा।" 56.
 
"Or, O head of the monkeys! If I die due to the excessive scolding of the demons, then all your efforts will go in vain." 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)