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ramayan 5.37.4: हे वानरों! भगवान के विधान को रोकना मनुष्यों के बस में नहीं है। उदाहरण के लिए, सुमित्रापुत्र लक्ष्मण, मुझे और श्री राम को देखो। हम कैसे विरह और शोक में लीन हो रहे हैं॥ 4॥   |   ramayan सर्ग 5.37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.37.4 
विधिर्नूनमसंहार्य: प्राणिनां प्लवगोत्तम।
सौमित्रं मां च रामं च व्यसनै: पश्य मोहितान्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे वानरों! भगवान के विधान को रोकना मनुष्यों के बस में नहीं है। उदाहरण के लिए, सुमित्रापुत्र लक्ष्मण, मुझे और श्री राम को देखो। हम कैसे विरह और शोक में लीन हो रहे हैं॥ 4॥
 
‘O head of monkeys! It is not in the power of mortals to stop the laws of God. For example, look at Sumitra's son Lakshman, me and Shri Ram. How we are getting engrossed in separation and sorrow.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)