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ramayan 5.37.38: तत्पश्चात्, पर्वत के समान विशाल, ताँबे के समान लाल मुख वाले, वज्र के समान दाँत और नख वाले भयंकर पराक्रमी वानर योद्धा हनुमान्‌जी विदेहनन्दिनी से इस प्रकार बोले -॥38॥   |   ramayan सर्ग 5.37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.37.38 
हरि: पर्वतसंकाशस्ताम्रवक्त्रो महाबल:।
वज्रदंष्ट्रनखो भीमो वैदेहीमिदमब्रवीत्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, पर्वत के समान विशाल, ताँबे के समान लाल मुख वाले, वज्र के समान दाँत और नख वाले भयंकर पराक्रमी वानर योद्धा हनुमान्‌जी विदेहनन्दिनी से इस प्रकार बोले -॥38॥
 
Thereafter, the fearsome, mighty monkey warrior Hanuman, who was as huge as a mountain, with a face as red as copper, and teeth and nails like thunderbolts, spoke to Videhanandini thus -॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)