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ramayan 5.37.34: वह सोचने लगा, 'काले नेत्रों वाली विदेहनन्दिनी सीता मेरे बल और प्रभाव को नहीं जानतीं। अतः आज वे मेरे उस रूप का दर्शन करें जिसे मैं अपनी इच्छानुसार धारण करता हूँ।'॥34॥   |   ramayan सर्ग 5.37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.37.34 
न मे जानाति सत्त्वं वा प्रभावं वासितेक्षणा।
तस्मात् पश्यतु वैदेही यद् रूपं मम कामत:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वह सोचने लगा, 'काले नेत्रों वाली विदेहनन्दिनी सीता मेरे बल और प्रभाव को नहीं जानतीं। अतः आज वे मेरे उस रूप का दर्शन करें जिसे मैं अपनी इच्छानुसार धारण करता हूँ।'॥34॥
 
He started thinking, 'Videhanandini Sita with the black eyes does not know my power and influence. So today she should see that form of mine which I assume as per my wish.'॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)