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श्लोक 5.37.34  |
न मे जानाति सत्त्वं वा प्रभावं वासितेक्षणा।
तस्मात् पश्यतु वैदेही यद् रूपं मम कामत:॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| वह सोचने लगा, 'काले नेत्रों वाली विदेहनन्दिनी सीता मेरे बल और प्रभाव को नहीं जानतीं। अतः आज वे मेरे उस रूप का दर्शन करें जिसे मैं अपनी इच्छानुसार धारण करता हूँ।'॥34॥ |
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| He started thinking, 'Videhanandini Sita with the black eyes does not know my power and influence. So today she should see that form of mine which I assume as per my wish.'॥ 34॥ |
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