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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.37.3 
ऐश्वर्ये वा सुविस्तीर्णे व्यसने वा सुदारुणे।
रज्ज्वेव पुरुषं बद्‍ध्वा कृतान्त: परिकर्षति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
चाहे कोई बहुत समृद्ध हो या भयंकर संकट में हो, समय उसे ऐसे खींचता है जैसे वह रस्सी से बंधा हो।
 
Whether one is situated in great prosperity or is in a terrible calamity, Time pulls the man as if he were tied with a rope.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)