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श्लोक 5.37.28  |
नहि मे सम्प्रयातस्य त्वामितो नयतोऽङ्गने।
अनुगन्तुं गतिं शक्ता: सर्वे लङ्कानिवासिन:॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| कल्याणी! जब मैं तुम्हें यहाँ से ले जाऊँगा, तब समस्त लंकावासी मिलकर भी मेरा पीछा नहीं कर सकेंगे॥ 28॥ |
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| ‘Kalyani! When I take you with me from here, even all the residents of Lanka together will not be able to chase me.॥ 28॥ |
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