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श्लोक 5.37.26  |
पृष्ठमारोह मे देवि मा विकाङ्क्षस्व शोभने।
योगमन्विच्छ रामेण शशाङ्केनेव रोहिणी॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| 'देवी! मेरी पीठ पर बैठो। सुन्दर दिखो! मेरी बात अनसुनी मत करो। जैसे रोहिणी चन्द्रमा से मिलती है, वैसे ही तुम श्री रामचन्द्रजी से मिलने का निश्चय करो।॥ 26॥ |
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| ‘Goddess! Please sit on my back. Look beautiful! Do not ignore my words. Just like Rohini who meets the moon, you should decide to meet Shri Ramchandraji.॥ 26॥ |
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