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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.37.26 
पृष्ठमारोह मे देवि मा विकाङ्क्षस्व शोभने।
योगमन्विच्छ रामेण शशाङ्केनेव रोहिणी॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'देवी! मेरी पीठ पर बैठो। सुन्दर दिखो! मेरी बात अनसुनी मत करो। जैसे रोहिणी चन्द्रमा से मिलती है, वैसे ही तुम श्री रामचन्द्रजी से मिलने का निश्चय करो।॥ 26॥
 
‘Goddess! Please sit on my back. Look beautiful! Do not ignore my words. Just like Rohini who meets the moon, you should decide to meet Shri Ramchandraji.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)