श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.37.21 
अथवा मोचयिष्यामि त्वामद्यैव सराक्षसात्।
अस्माद् दु:खादुपारोह मम पृष्ठमनिन्दिते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'या मैं तुम्हें राक्षसों द्वारा उत्पन्न इस कष्ट से मुक्त कर दूँगा। हे सती-साध्वी देवी! कृपया मेरी पीठ पर बैठो।'
 
‘Or I will free you from this suffering caused by the demons. O Sati-Sadhvi Devi! Please sit on my back.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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