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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.37.20 
श्रुत्वैव च वचो मह्यं क्षिप्रमेष्यति राघव:।
चमूं प्रकर्षन् महतीं हर्यृक्षगणसंकुलाम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'देवी! धैर्य रखो। मेरी बात सुनकर श्री रघुनाथजी शीघ्र ही वानरों और भालुओं की विशाल सेना के साथ यहाँ के लिए प्रस्थान करेंगे।
 
‘Devi! Please be patient. On hearing my words, Shri Raghunathji will soon depart for here with a huge army of monkeys and bears.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)