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ramayan 5.37.19: ऐसा कहते-कहते सीता के मुख से आँसू बहने लगे। वे श्री रामचन्द्र के लिए शोक कर रही थीं। उस समय महाबली हनुमान ने उनसे कहा -॥19॥   |   ramayan सर्ग 5.37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.37.19 
इति संजल्पमानां तां रामार्थे शोककर्शिताम्।
अश्रुसम्पूर्णवदनामुवाच हनुमान् कपि:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहते-कहते सीता के मुख से आँसू बहने लगे। वे श्री रामचन्द्र के लिए शोक कर रही थीं। उस समय महाबली हनुमान ने उनसे कहा -॥19॥
 
While saying this, Sita's face started to fill with tears. She was grieving for Shri Ramchandra. At that time the great monkey Hanuman said to her -॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)