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ramayan 5.37.18: हे वानर! पराक्रमी प्रभु श्री राम सूर्य के समान हैं। उनके बाण उनकी किरणें हैं। उनसे वे शीघ्र ही शत्रु राक्षस रूपी जल को सोख लेंगे।॥18॥   |   ramayan सर्ग 5.37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.37.18 
शरजालांशुमान् शूर: कपे रामदिवाकर:।
शत्रुरक्षोमयं तोयमुपशोषं नयिष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे वानर! पराक्रमी प्रभु श्री राम सूर्य के समान हैं। उनके बाण उनकी किरणें हैं। उनसे वे शीघ्र ही शत्रु राक्षस रूपी जल को सोख लेंगे।॥18॥
 
O monkey! The valiant Lord Shri Ram is like the Sun. His arrows are His rays. With them, He will soon absorb the water in the form of the enemy demon.'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)