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ramayan 5.37.17: श्री रामचन्द्रजी मनुष्यों में श्रेष्ठ हैं। उनका संकटों से दबना या विचलित होना सर्वथा असम्भव है। जैसे पुलोमपुत्री शची इन्द्र के प्रभाव को जानती है, वैसे ही मैं श्री रघुनाथजी के बल और पराक्रम को भली-भाँति जानती हूँ॥ 17॥   |   ramayan सर्ग 5.37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.37.17 
न स शक्यस्तुलयितुं व्यसनै: पुरुषर्षभ:।
अहं तस्यानुभावज्ञा शक्रस्येव पुलोमजा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी मनुष्यों में श्रेष्ठ हैं। उनका संकटों से दबना या विचलित होना सर्वथा असम्भव है। जैसे पुलोमपुत्री शची इन्द्र के प्रभाव को जानती है, वैसे ही मैं श्री रघुनाथजी के बल और पराक्रम को भली-भाँति जानती हूँ॥ 17॥
 
‘Sri Ramachandraji is the best among men. It is absolutely impossible for him to be weighed down or disturbed by troubles. Just as Pulom's daughter Sachi knows the influence of Indra, in the same way I know very well the power and strength of Shri Raghunathji.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)