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ramayan 5.37.16: जिसने अपने भाई की सहायता के बिना ही जनस्थान में चौदह हजार राक्षसों का वध कर दिया, उससे कौन शत्रु नहीं डरेगा?॥16॥   |   ramayan सर्ग 5.37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.37.16 
चतुर्दश सहस्राणि राक्षसानां जघान य:।
जनस्थाने विना भ्रात्रा शत्रु: कस्तस्य नोद्विजेत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जिसने अपने भाई की सहायता के बिना ही जनस्थान में चौदह हजार राक्षसों का वध कर दिया, उससे कौन शत्रु नहीं डरेगा?॥16॥
 
Which enemy would not be afraid of the One who killed fourteen thousand demons in Janasthan without the help of his brother?॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)