श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.37.15 
उत्साह: पौरुषं सत्त्वमानृशंस्यं कृतज्ञता।
विक्रमश्च प्रभावश्च सन्ति वानर राघवे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वानर! श्री रामचन्द्रजी में उत्साह, पुरुषार्थ, बल, दया, कृतज्ञता, पराक्रम और प्रभाव आदि सभी गुण विद्यमान हैं॥ 15॥
 
Monkey! Shri Ramchandraji possesses all the qualities like enthusiasm, effort, strength, kindness, gratitude, valour and influence.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)