| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना » श्लोक 12 |
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| | | | श्लोक 5.37.12  | अविन्ध्यो नाम मेधावी विद्वान् राक्षसपुङ्गव:।
धृतिमाञ्छीलवान् वृद्धो रावणस्य सुसम्मत:॥ १२॥ | | | | | | अनुवाद | | अविन्ध्य नाम का एक महान् राक्षस है, जो बड़ा बुद्धिमान, विद्वान्, धैर्यवान, सौम्य, वृद्ध और रावण के आदर के योग्य है॥12॥ | | | | There is a great demon named Avindhya, who is very intelligent, learned, patient, gentle, old and worthy of Ravana's respect. 12॥ | | ✨ ai-generated | | |
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