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ramayan 5.37.10: ‘मेरा लौटना रावण को अच्छा नहीं लग रहा है, क्योंकि वह काल के अधीन हो रहा है और मृत्यु युद्ध में उसे खोज रही है।॥10॥   |   ramayan सर्ग 5.37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 37: सीता का हनुमान जी से श्रीराम को शीघ्र बुलाने का आग्रह, हनुमान जी का सीता से अपने साथ चलने का अनुरोध तथा सीता का अस्वीकार करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.37.10 
मम प्रतिप्रदानं हि रावणस्य न रोचते।
रावणं मार्गते संख्ये मृत्यु: कालवशंगतम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘मेरा लौटना रावण को अच्छा नहीं लग रहा है, क्योंकि वह काल के अधीन हो रहा है और मृत्यु युद्ध में उसे खोज रही है।॥10॥
 
‘My return is not pleasing to Ravana, for he is becoming subject to time and death is searching for him in the war.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)