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श्लोक 5.36.9  |
नहि त्वां प्राकृतं मन्ये वानरं वानरर्षभ।
यस्य ते नास्ति संत्रासो रावणादपि सम्भ्रम:॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| वानर शिरोमणे! मैं तुम्हें साधारण वानर नहीं मानता; क्योंकि तुम्हारे मन में रावण जैसे राक्षस से भी न तो भय है और न ही घबराहट॥9॥ |
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| Vanar Shiromane! I do not consider you to be an ordinary monkey; because in your mind there is neither fear nor panic even from a demon like Ravana.॥ 9॥ |
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