श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.36.9 
नहि त्वां प्राकृतं मन्ये वानरं वानरर्षभ।
यस्य ते नास्ति संत्रासो रावणादपि सम्भ्रम:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वानर शिरोमणे! मैं तुम्हें साधारण वानर नहीं मानता; क्योंकि तुम्हारे मन में रावण जैसे राक्षस से भी न तो भय है और न ही घबराहट॥9॥
 
Vanar Shiromane! I do not consider you to be an ordinary monkey; because in your mind there is neither fear nor panic even from a demon like Ravana.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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