श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.36.41 
न मांसं राघवो भुङ्‍क्ते न चैव मधु सेवते।
वन्यं सुविहितं नित्यं भक्तमश्नाति पञ्चमम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
‘कोई भी रघुवंशी मांस नहीं खाता और मधु नहीं खाता; फिर भगवान राम क्यों इनका सेवन करते हैं? वे तो दिन में चार बार उपवास करते हैं और पाँचवें समय में शास्त्रविधि के अनुसार जंगली फल, मूल और शाक आदि खाते हैं॥ 41॥
 
‘No Raghuvanshi eats meat or consumes honey; then why does Lord Rama consume these things? He always fasts four times a day and in the fifth time eats wild fruits, roots and herbs etc. as prescribed by the scriptures.॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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