Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.36.35: ककुत्स्थकुलभूषण श्री राम अपने बाणों से अक्षोभ्य सागर को स्तब्ध कर देंगे और उस पर सेतु बनाकर लंकापुरी पहुँचकर उसे राक्षसों से निर्जन कर देंगे॥35॥ | ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ककुत्स्थकुलभूषण श्री राम अपने बाणों से अक्षोभ्य सागर को स्तब्ध कर देंगे और उस पर सेतु बनाकर लंकापुरी पहुँचकर उसे राक्षसों से निर्जन कर देंगे॥35॥
Kakutsthakulbhushan Shri Ram will stun the Akshobhya ocean with his arrows and will reach Lankapuri by building a bridge over it and will make it deserted from the demons. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥