श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.36.34 
श्रुत्वैव च वचो मह्यं क्षिप्रमेष्यति राघव:।
चमूं प्रकर्षन् महतीं हर्यृक्षगणसंयुताम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जब मैं यहाँ से लौटूँगा, तब मेरी बात सुनकर श्री रघुनाथजी वानरों और भालुओं की विशाल सेना के साथ तुरन्त वहाँ से चले जाएँगे॥ 34॥
 
When I return from here, on hearing what I say, Sri Raghunatha will immediately leave from there with a huge army of monkeys and bears.॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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