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ramayan 5.36.31: वानरश्रेष्ठ हनुमान्‌ से ऐसे मधुर अर्थयुक्त वचन कहकर देवी सीता श्री रामचन्द्रजी की सुन्दर वाणी सुनने के लिए पुनः मौन हो गईं॥31॥   |   ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.36.31 
इतीव देवी वचनं महार्थं
तं वानरेन्द्रं मधुरार्थमुक्त्वा।
श्रोतुं पुनस्तस्य वचोऽभिरामं
रामार्थयुक्तं विरराम रामा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वानरश्रेष्ठ हनुमान्‌ से ऐसे मधुर अर्थयुक्त वचन कहकर देवी सीता श्री रामचन्द्रजी की सुन्दर वाणी सुनने के लिए पुनः मौन हो गईं॥31॥
 
After speaking such sweet words with great meaning to Hanuman, the best of the monkeys, Goddess Sita became silent to hear again the beautiful voice of Shri Ramchandraji. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)