श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.36.3 
प्रत्ययार्थं तवानीतं तेन दत्तं महात्मना।
समाश्वसिहि भद्रं ते क्षीणदु:खफला ह्यसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
मैं केवल आपको आश्वस्त करने के लिए यह लाया हूँ। महात्मा श्री रामचंद्रजी ने स्वयं मेरे हाथ में यह अंगूठी दी थी। आपका कल्याण हो। अब आप धैर्य रखें। आपको जो दुःख हो रहा था, वह अब समाप्त हो गया है।॥3॥
 
I have brought this only to reassure you. Mahatma Shri Ramchandraji himself had given this ring in my hand. May you be blessed. Now you must be patient. The sorrow that you were getting has now come to an end.'॥ 3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas