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ramayan 5.36.27: क्या मैं युद्ध में श्री रघुनाथजी द्वारा भयंकर अस्त्रों से थोड़े ही समय में रावण को उसके बन्धुओं सहित मारा हुआ देखूँगा?॥ 27॥   |   ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.36.27 
रौद्रेण कच्चिदस्त्रेण रामेण निहतं रणे।
द्रक्ष्याम्यल्पेन कालेन रावणं ससुहृज्जनम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
क्या मैं युद्ध में श्री रघुनाथजी द्वारा भयंकर अस्त्रों से थोड़े ही समय में रावण को उसके बन्धुओं सहित मारा हुआ देखूँगा?॥ 27॥
 
Will I see Ravana along with his relatives killed in a battle by Sri Raghunathji with terrible weapons in a short time?॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)