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श्लोक 5.36.27  |
रौद्रेण कच्चिदस्त्रेण रामेण निहतं रणे।
द्रक्ष्याम्यल्पेन कालेन रावणं ससुहृज्जनम्॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| क्या मैं युद्ध में श्री रघुनाथजी द्वारा भयंकर अस्त्रों से थोड़े ही समय में रावण को उसके बन्धुओं सहित मारा हुआ देखूँगा?॥ 27॥ |
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| Will I see Ravana along with his relatives killed in a battle by Sri Raghunathji with terrible weapons in a short time?॥ 27॥ |
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