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ramayan 5.36.22: क्या वह माता कौशल्या, सुमित्रा और भरत के कुशल समाचार नियमित रूप से प्राप्त करता है?॥ 22॥   |   ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.36.22 
कौसल्यायास्तथा कच्चित् सुमित्रायास्तथैव च।
अभीक्ष्णं श्रूयते कच्चित् कुशलं भरतस्य च॥ २२॥
 
 
अनुवाद
क्या वह माता कौशल्या, सुमित्रा और भरत के कुशल समाचार नियमित रूप से प्राप्त करता है?॥ 22॥
 
‘Does he regularly receive news about the well-being of mother Kausalya, Sumitra and Bharata?॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)