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ramayan 5.36.21: वे सदैव सुख भोगने के योग्य हैं और कभी दुःख भोगने के योग्य नहीं हैं; परंतु क्या श्री रामजी इन दिनों दुःख पर दुःख भोगने के कारण अधिक दुःखी और थके हुए नहीं हो गए हैं?॥ 21॥   |   ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.36.21 
सुखानामुचितो नित्यमसुखानामनूचित:।
दु:खमुत्तरमासाद्य कच्चिद् रामो न सीदति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वे सदैव सुख भोगने के योग्य हैं और कभी दुःख भोगने के योग्य नहीं हैं; परंतु क्या श्री रामजी इन दिनों दुःख पर दुःख भोगने के कारण अधिक दुःखी और थके हुए नहीं हो गए हैं?॥ 21॥
 
‘He is always fit to enjoy happiness and never fit to suffer sorrow; but hasn’t Shri Ram become more sad and weary due to facing sorrow after sorrow these days?॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)