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ramayan 5.36.19: क्या राजकुमार श्रीराम कभी देवताओं का आशीर्वाद लेते हैं - क्या वे उनकी दया की प्रार्थना करते हैं? क्या वे पुरुषार्थ और भाग्य, दोनों का सहारा लेते हैं?   |   ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.36.19 
कच्चिदाशास्ति देवानां प्रसादं पार्थिवात्मज:।
कच्चित् पुरुषकारं च दैवं च प्रतिपद्यते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
क्या राजकुमार श्रीराम कभी देवताओं का आशीर्वाद लेते हैं - क्या वे उनकी दया की प्रार्थना करते हैं? क्या वे पुरुषार्थ और भाग्य, दोनों का सहारा लेते हैं?
 
‘Does Prince Shri Ram ever seek the blessings of the gods – does he pray for their mercy? Does he take recourse to both effort and destiny?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)