Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.36.18: क्या श्री राम स्वयं मित्र जुटाने का प्रयत्न करते हैं? क्या उनके शत्रु भी उनकी शरण में आते हैं? क्या उन्होंने अपने मित्रों का उपकार किया है और उन्हें अपना हितकारी बनाया है? क्या उनके मित्र कभी उनका उपकार करते हैं या उन्हें पुरस्कृत करते हैं?॥18॥ | ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्या श्री राम स्वयं मित्र जुटाने का प्रयत्न करते हैं? क्या उनके शत्रु भी उनकी शरण में आते हैं? क्या उन्होंने अपने मित्रों का उपकार किया है और उन्हें अपना हितकारी बनाया है? क्या उनके मित्र कभी उनका उपकार करते हैं या उन्हें पुरस्कृत करते हैं?॥18॥
‘Does Shri Ram himself make efforts to gather friends? Do even his enemies come to him seeking refuge? Has he done good to his friends and made them beneficial to him? Is he ever obliged or rewarded by his friends?॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥