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द्विविधं त्रिविधोपायमुपायमपि सेवते।
विजिगीषु: सुहृत् कच्चिन्मित्रेषु च परंतप:॥ १७॥
अनुवाद
‘क्या शत्रुओं को पीड़ा देने वाले श्री राम अपने मित्रों के प्रति मैत्रीभाव से केवल साम (शांति और दान) इन दो उपायों को ही अपनाते हैं? और क्या वे अपने शत्रुओं को परास्त करने की इच्छा से केवल दान, भेद और दण्ड इन तीन उपायों को ही अपनाते हैं?॥ 17॥
‘Does Shri Ram, who torments his enemies, adopt only the two methods of Sama (peace and charity) with a friendly attitude towards his friends? And does he adopt only the three methods of charity, discrimination and punishment with a desire to defeat his enemies?॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥