श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.36.16 
कच्चिन्न दीन: सम्भ्रान्त: कार्येषु च न मुह्यति।
कच्चित् पुरुषकार्याणि कुरुते नृपते: सुत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
क्या उन्हें किसी प्रकार की दुर्बलता या घबराहट होती है? क्या वे काम करते समय आसक्ति से ग्रस्त हो जाते हैं? क्या राजकुमार श्रीराम पुरुषार्थ करते हैं?॥16॥
 
‘Is he suffering from any kind of weakness or nervousness? Does he get overcome by attachment while working? Does Prince Shri Ram perform manly tasks (purushaarth)?॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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