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श्लोक 5.36.16  |
कच्चिन्न दीन: सम्भ्रान्त: कार्येषु च न मुह्यति।
कच्चित् पुरुषकार्याणि कुरुते नृपते: सुत:॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| क्या उन्हें किसी प्रकार की दुर्बलता या घबराहट होती है? क्या वे काम करते समय आसक्ति से ग्रस्त हो जाते हैं? क्या राजकुमार श्रीराम पुरुषार्थ करते हैं?॥16॥ |
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| ‘Is he suffering from any kind of weakness or nervousness? Does he get overcome by attachment while working? Does Prince Shri Ram perform manly tasks (purushaarth)?॥ 16॥ |
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