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ramayan 5.36.13: यदि ककुत्स्थ कुल के रत्न श्री राम सुरक्षित हैं, तो फिर वे प्रलयकाल में उठने वाली प्रलयकालीन अग्नि के समान क्रोधित होकर समुद्रों से घिरी हुई सम्पूर्ण पृथ्वी को क्यों नहीं जला डालते?॥13॥   |   ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.36.13 
कुशली यदि काकुत्स्थ: किं न सागरमेखलाम्।
महीं दहति कोपेन युगान्ताग्निरिवोत्थित:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यदि ककुत्स्थ कुल के रत्न श्री राम सुरक्षित हैं, तो फिर वे प्रलयकाल में उठने वाली प्रलयकालीन अग्नि के समान क्रोधित होकर समुद्रों से घिरी हुई सम्पूर्ण पृथ्वी को क्यों नहीं जला डालते?॥13॥
 
If Sri Rama, the jewel of the Kakutstha clan, is safe, then why doesn't he, like the doomsday fire that rises during the time of deluge, become angry and burn the entire earth surrounded by oceans?॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)