श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.36.12 
दिष्टॺा च कुशली रामो धर्मात्मा सत्यसंगर:।
लक्ष्मणश्च महातेजा: सुमित्रानन्दवर्धन:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैं यह जानकर अत्यन्त प्रसन्न हूँ कि सत्यवादी एवं सदाचारी भगवान् राम सकुशल हैं और सुमित्रा का आनन्द बढ़ाने वाले महाबली लक्ष्मण भी स्वस्थ एवं प्रसन्न हैं। यह शुभ समाचार मेरे लिए सौभाग्य का सूचक है॥ 12॥
 
I am very happy to know that the truthful and virtuous Lord Rama is safe and sound and that the mighty Lakshmana, who increased the joy of Sumitra, is also healthy and happy. This auspicious news is a sign of good fortune for me.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)