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ramayan 5.36.1: तत्पश्चात् महातेजस्वी पवनकुमार हनुमान्‌जी ने सीताजी को आश्वस्त करने के लिए पुनः उनसे विनयपूर्वक कहा - 1॥   |   ramayan सर्ग 5.36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 36: हनुमान जी का सीता को मुद्रिका देना, सीता का ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान् का श्रीराम के सीताविषयक प्रेम का वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.36.1 
भूय एव महातेजा हनूमान् पवनात्मज:।
अब्रवीत् प्रश्रितं वाक्यं सीताप्रत्ययकारणात्॥ १॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महातेजस्वी पवनकुमार हनुमान्‌जी ने सीताजी को आश्वस्त करने के लिए पुनः उनसे विनयपूर्वक कहा - 1॥
 
Thereafter, the great and brilliant Pawankumar Hanumanji again spoke polite words to Sitaji to reassure her - 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)