Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.35.9-10: वे तेज में सूर्य के समान, क्षमा में पृथ्वी के समान, बुद्धि में बृहस्पति के समान और यश में इन्द्र के समान हैं। वे सम्पूर्ण चराचर जगत के तथा अपने बन्धुओं के भी रक्षक हैं। शत्रुओं को संताप देने वाले श्री राम उनके नीति और धर्म की रक्षा करते हैं। 9-10॥ | ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेजसाऽऽदित्यसंकाश: क्षमया पृथिवीसम:।
बृहस्पतिसमो बुद्धॺा यशसा वासवोपम:॥ ९॥
रक्षिता जीवलोकस्य स्वजनस्य च रक्षिता।
रक्षिता स्वस्य वृत्तस्य धर्मस्य च परंतप:॥ १०॥
अनुवाद
वे तेज में सूर्य के समान, क्षमा में पृथ्वी के समान, बुद्धि में बृहस्पति के समान और यश में इन्द्र के समान हैं। वे सम्पूर्ण चराचर जगत के तथा अपने बन्धुओं के भी रक्षक हैं। शत्रुओं को संताप देने वाले श्री राम उनके नीति और धर्म की रक्षा करते हैं। 9-10॥
He is like the Sun in brightness, like the Earth in forgiveness, like Jupiter in wisdom and like Indra in fame. He is the protector of the entire living world and also of his relatives. Shri Ram, who torments his enemies, protects his morality and religion. 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥