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ramayan 5.35.8: 'जनकनन्दिनी! श्री रामचन्द्रजी के नेत्र खिले हुए कमल के पत्ते के समान बड़े और सुन्दर हैं। उनका मुखमण्डल पूर्ण चन्द्रमा के समान मनोहर है। वे जन्म से ही सौन्दर्य और उदारता जैसे गुणों से युक्त हैं।॥8॥   |   ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.35.8 
राम: कमलपत्राक्ष: पूर्णचन्द्रनिभानन:।
रूपदाक्षिण्यसम्पन्न: प्रसूतो जनकात्मजे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'जनकनन्दिनी! श्री रामचन्द्रजी के नेत्र खिले हुए कमल के पत्ते के समान बड़े और सुन्दर हैं। उनका मुखमण्डल पूर्ण चन्द्रमा के समान मनोहर है। वे जन्म से ही सौन्दर्य और उदारता जैसे गुणों से युक्त हैं।॥8॥
 
‘Janakanandini! Shri Ramchandraji's eyes are large and beautiful like a blooming lotus leaf. His face is as charming as the full moon. He is blessed with qualities like beauty and generosity since his birth.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)