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ramayan 5.34.4: आपके पति के सेवक और प्रियतम, महाबली और बलवान लक्ष्मण ने भी शोक से व्याकुल होकर आपके चरणों में सिर नवाकर आपको प्रणाम किया है। ॥4॥   |   ramayan सर्ग 5.34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.34.4 
लक्ष्मणश्च महातेजा भर्तुस्तेऽनुचर: प्रिय:।
कृतवाञ्छोकसंतप्त: शिरसा तेऽभिवादनम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
आपके पति के सेवक और प्रियतम, महाबली और बलवान लक्ष्मण ने भी शोक से व्याकुल होकर आपके चरणों में सिर नवाकर आपको प्रणाम किया है। ॥4॥
 
"Your husband's attendant and beloved Lakshmana, the great and powerful one, has also bowed his head at your feet and sent his obeisance to you, being overwhelmed with grief." ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)