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ramayan 5.34.39: मैं समुद्र पार करके और दुष्ट रावण के सिर पर पैर रखकर लंकापुरी में प्रवेश कर चुका हूँ।   |   ramayan सर्ग 5.34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.34.39 
प्रविष्टो नगरीं लङ्कां लङ्घयित्वा महोदधिम्।
कृत्वा मूर्ध्नि पदन्यासं रावणस्य दुरात्मन:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
मैं समुद्र पार करके और दुष्ट रावण के सिर पर पैर रखकर लंकापुरी में प्रवेश कर चुका हूँ।
 
I have entered Lankapuri by crossing the ocean and placing my foot on the head of the evil-minded Ravana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)